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یَوۡمَئِذٍ لَّا تَنۡفَعُ الشَّفَاعَۃُ اِلَّا مَنۡ اَذِنَ لَہُ الرَّحۡمٰنُ وَ رَضِیَ لَہٗ قَوۡلًا ﴿۱۰۹﴾

109. اس دن سفارش سود مند نہ ہوگی سوائے اس شخص (کی سفارش) کے جسے (خدائے) رحمان نے اذن (و اجازت) دے دی ہے اور جس کی بات سے وہ راضی ہوگیا ہے (جیسا کہ انبیاء و مرسلین، اولیاء، متقین، معصوم بچوں اور دیگر کئی بندوں کا شفاعت کرنا ثابت ہے)o

109. On that Day, no intercession shall be fruitful except his (intercession) whom the Most Kind (Lord) has granted leave (and permission) and with whose word He is pleased (such as Prophets and Messengers, Allah’s chosen and pious servants, Godwary slaves, innocent children, and many other devoted servants of Allah whose intercession is validated).

109. Yawmaithin la tanfaAAu alshshafaAAatu illa man athina lahu alrrahmanu waradiya lahu qawlan

109. På denne dagen vil ikke forbønn være til noen nytte, unntatt den (dens forbønn) som har fått tillatelse av den mest Barmhjertige (Herren), og hvis ord Han er blitt tilfreds med (slik som profetene og sendebudene, helgenene, de gudfryktige, små uskyldige barn og mange andre folk vil gå i forbønn hvis forbønn er godtatt hos Allah).

109. उस दिन सिफारिश सूदमन्द न होगी सिवाए उस शख़्स (की सिफारिश) के जिसे (खु़दाए) रहमान ने इज़्नो (इजाज़त) दे दी है और जिसकी बात से वोह राज़ी हो गया है (जैसा कि अम्बियाओ मुर्सलीन, औलिया, मुत्तक़ीन, मासूम बच्चों और दीगर कई बन्दों का शफाअ़त करना साबित है) ।

১০৯. সে দিন কোনো সুপারিশ উপকারে আসবে না, তাঁর (সুপারিশ) ছাড়া যাকে অনুগ্রহশীল (আল্লাহ্) সম্মতি (ও অনুমতি) দিয়েছেন এবং যার কথার উপর তিনি সন্তুষ্ট হয়েছেন। (যেমন নবী, রাসূল, আউলিয়া, মুত্তাকী, নিষ্পাপ শিশু ও অন্যান্য আরো কয়েক প্রকারের বান্দার শাফায়াত বৈধ।)

(طهٰ، 20 : 109)